खामोशियों से भरी कशमकश

कशमकश से दोराहे पे खड़ी ज़िन्दगी….,

ये कशमकश मेरी उलझने बढ़ते ही जाता हैं…।

ढलता चांद.., निकलता सुरज…, अब वक़्त बढ़ाते जाता हैं…।।IMG 20201004 085028

बढ़ते हर एक पल पल में.. अहसास बढ़ाए जाता है..,

दोस्त, अज़ीज़, साथी मेरे सब छूटता सा जाता है…,

दिल करता है रोक दू मै.., हर पल अज़ीजो के लिए..।

अपनों की ख़ुशी देखकर…, ये दिल बदलता जता हैं…,

ढलता सूरज.., निकलता चांद.., अब वक़्त बढ़ाते जाता हैं….।।IMG 20201004 084846

कभी कानो मै सुनती खिलखिलाहट..,

अपनों के मुस्कान की…।

कभी होते रहते अक्श बार …, अश्कों की बरसात की।।IMG 20200628 100929 1

कभी चुप होकर थोड़ा रो कर , फिर मुस्काए जाते है.

ढलता सूरज.., निकलता चांद.., वक़्त बढ़ाते जाता हैं।

3 thoughts on “खामोशियों से भरी कशमकश

  1. Ek farmaish
    Do raahe par khadi ladki jana kahin chahti hai aur family kahin le ja rahi ☺️☺️

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