कोई यूं ही कवि नहीं बन जाता।।

लोग कहते हैं कैसे लिख लेती हो जज्बातों को…?? तो सुने…

लिखने की बात है तो आज बता दूं…!

कोई यूं ही अल्फाजों में जज्बात नहीं सजाता…,

कोई यूं ही तारीफ लूटने के लिए अपना दर्द नहीं बताता..!!IMG 20200709 100842

होते हैं जिंदगी में दर्द बेशुमार…,

कोई यूं ही कवी नहीं बन जाता…!

यू जज़्बातों को अल्फाजों में पिरोना आसान नहीं होता..,

अपनी रूह को दर्द की गहरे समंदर में डूबोना आसान नहीं होता..!!IMG20200709100005

जज्बातों को यूंही…. नहीं उतार दिया जाता.., कागज पर..,

खुद को आंसुओं की स्याही बनना पड़ता है…!

इतना करने पर भी तो हर किसी को..,अल्फाजों में छुपा दर्द महसूस नहीं होता…!!

दिल को दर्द की तपिश में जलाना पड़ता है.…!

लोग कहते हम भी लिखलें.., लिखने में क्या है..?IMG20200709095540

पर हर किसी को यह रुह लिखना पढ़ना नहीं आता..।

यहां गमों के साथ मुस्कुराना पड़ता हैं…,

जो ना समझ पाए दर्द की गहराई को लोग..! तो…,

जज्बातों को अल्फाजों में पिरोना पड़ता है….!!IMG20200709095623

लोगों को लगता क्या खुशमिजाज शायर है…..!

और हमें…,हर गम को ,दूजे का नाम देकर छुपाना पड़ता है।।

🌹#ज़ख्मी रूह 🌹

6 thoughts on “कोई यूं ही कवि नहीं बन जाता।।

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